
दोपहर की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर अंदर आ रही थी।
कमरे में अभी भी सेक्स की गंध और पसीने की गर्मी बाकी थी। मिशिका पाँचों भाइयों के बीच लेटी हुई थी। उसका सिर राजवीर की बाँह पर था, आर्यनवीर ने उसका एक हाथ पकड़ रखा था, रणवीर पेट पर हाथ फेरे जा रहा था, जयवीर और यशवीर दोनों तरफ से उसकी जांघों से सटे हुए थे।









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