
राजवीर उठा और ठंडी पड़ चुकी ट्रे को फिर से व्यवस्थित करने लगा। उसने माइक्रोवेव में पराठों को गर्म किया, आमलेट को फ्रेश किया, फलों को सावधानी से काटा और प्लेट में सजाया। बाकी चारों भाई मिशिका के चारों तरफ ही लेटे रहे। आर्यनवीर उसके बालों में उंगलियाँ फेर रहा था, धीरे-धीरे, जैसे कोई अनमोल चीज़ संभाल रहा हो। रणवीर उसके पेट पर हल्के-हल्के हाथ फेर रहा था, नाभि के आसपास घुमाते हुए, कभी-कभी नीचे की तरफ सरकते हुए। जयवीर और यशवीर दोनों तरफ से उसके हाथ पकड़े हुए थे, अपनी उंगलियों को उसकी हथेली में फँसाए हुए।
मिशिका अभी भी पूरी तरह नंगी थी। सफ़ेद चादर आधी उतरी हुई थी, उसके गोल-गोल स्तनों को पूरी तरह ढक नहीं पा रही थी। गुलाबी निप्पल्स हवा में सख्त हो रहे थे। शरीर पर रात और सुबह के काटने-मसलने के निशान साफ चमक रहे थे—गर्दन पर बैंगनी निशान, स्तनों पर दाँत के निशान, जाँघों के अंदर लाल-लाल धारियाँ। योनि से अभी भी हल्का-हल्का रस रिस रहा था, जो उसकी जाँघों के अंदर चमक रहा था और चादर को गीला कर रहा था।









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