
करण ने उसकी दूसरी टाँग भी अपनी कमर पर चढ़ा ली। अब नयनतारा पूरी तरह उसकी बाँहों में थी। दीवार से सटी। करण ने नीचे से और भी जंगली धक्के मारने शुरू कर दिए। हर झटका इतना जोरदार था कि नयनतारा की चीखें बेकाबू हो रही थीं। dick बार-बार उसके सबसे अंदर जाकर टकरा रहा था। नयनतारा की आँखें लगभग बंद थीं। मुँह खुला। वह करण के गले में फिर से दाँत गड़ाते हुए चिल्ला रही थी—
“हाँ… हाँ… और तेज… चोदो… जंगली… अह… करण… मैं… आ… रही हूँ…!”









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