
दिव्यम ने रफ्तार और बढ़ा दी। दोनों हाथों से गाँड को उठाए रखा और जीभ से उसकी चूत को पूरी तरह चाटते, चूसते, कुरेदते रहा। नयनतारा का शरीर अचानक अकड़ गया। कमर हवा में उठ गई। एक लंबी, दबी हुई सिसकी के साथ उसका चरम आ गया। जाँघें दिव्यम के सिर के चारों तरफ सिमट गईं। शरीर काँपता रहा। दिव्यम ने तब तक नहीं छोड़ा जब तक नयनतारा की सिसकियाँ धीमी नहीं पड़ गईं और शरीर ढीला नहीं हो गया।
वह धीरे-धीरे ऊपर आया। होठ और ठुड्डी पूरी तरह चमक रहे थे। नयनतारा की आँखें आधी बंद थीं। साँसें अभी भी तेज चल रही थीं। दिव्यम ने उसके माथे पर होठ रखे और कम आवाज़ में पूछा—









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