
पुष्कर का कमरा हॉल के दूसरे सिरे पर था। दरवाज़ा बंद होते ही उसने कुंडी लगा दी। नयनतारा मुड़ी तो पुष्कर पहले से ही उसके बिल्कुल करीब खड़ा था। आँखों में मेज़ के नीचे वाली वही भूख थी—अब और खुली हुई।
“मेज़ के नीचे सिर्फ उँगली थी,” उसने कमर में हाथ डालते हुए कहा। “अब पूरा लेना है। डोगी में। जोर से।”









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