
करण मुस्कुराया—थका हुआ लेकिन अभी भी सख्त। उसने निकाला, नयनतारा को करवट दी और पीछे से फिर से घुसा दिया। एक हाथ से उसके स्तन को मसला, दूसरे से क्लिट सहलाते हुए जोरदार धक्के मारने लगा। नयनतारा तकिये में मुँह दबाए सिसक रही थी। करण ने उसके कान में कहा—
“अब पूरी तरह भर दूँगा। आज तुम्हारे अंदर मेरा ही रहेगा।”









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