
हॉल में चारों भाई गहरी नींद में थे। राजवीर सोफे पर फैला हुआ, रणवीर कुर्सी पर सिर झुकाए, जयवीर और यशवीर फर्श पर एक-दूसरे से सटे हुए। पंखा धीरे-धीरे घूम रहा था। अचानक राजवीर की आँखें खुल गईं। ऊपर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं—मिशिका की लंबी कराहें, बिस्तर की चरमराहट, और आर्यनवीर की भारी साँसें।
राजवीर उठा। उसकी नींद पूरी तरह उड़ चुकी थी। उसने रणवीर के कंधे पर हाथ रखा। “उठ… ऊपर से आवाज आ रही है।”









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