
एक घंटे बाद…
हॉल में अब सिर्फ मंद रोशनी थी। बाकी चार भाई थकान के मारे सोफे और कुर्सियों पर बिखर चुके थे। राजवीर की आँखें बंद थीं, रणवीर दीवार से लगकर बैठा साँसें ले रहा था, जयवीर और यशवीर एक-दूसरे के बगल में लेटे हुए धीमी नींद में थे। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज और कभी-कभी किसी की गहरी साँस सुनाई दे रही थी।









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