
जयवीर मिशिका की तरफ झुकते हुए बोला, “इतनी आसानी से नहीं, जान। थोड़ा तो परेशान करना हमारा भी बनता है।”
यह बोलते हुए जयवीर के होंठ मिशिका के कंधे पर धीरे-धीरे टिक गए। उसके नरम, गर्म होंठ ने कंधे की हड्डी पर हल्का-सा दबाव डाला, फिर जीभ की नोक से उस जगह को चाटते हुए ऊपर की ओर खिसकने लगा। मिशिका की साँस अटक गई। जयवीर की दाढ़ी की हल्की खरोंच उसके नाज़ुक त्वचा पर रेंग रही थी।









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