
मिशिका बहुत ध्यान से राजवीर को देख रही थी। सच में, राजवीर देखने में बहुत ही ज्यादा हैंडसम था। उसके तेज नैन-नक्श, गहरी आँखें, चौड़ी छाती और वो मजबूत बाहें—सब कुछ मिशिका को पागल कर रहा था। बुखार और दर्द के बावजूद उसके शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। मिशिका धीरे-धीरे उठने लगी, जिसे देख राजवीर हैरानी से बोला, “यह क्या कर रही हो जान? कुछ देर इसी तरह लेटी रहो।”
लेकिन मिशिका ने अचानक से राजवीर के होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे पागलों की तरह चूमने लगी। उसके होंठ नरम थे, थोड़े गर्म, और उनमें एक बेचैनी थी जो राजवीर को तुरंत महसूस हो गई। मिशिका के होंठ उसके होठों पर दबे हुए थे, जीभ की नोक धीरे-धीरे उसके निचले होंठ को छू रही थी। राजवीर की साँस रुक गई। उसने मिशिका के कंधों को पकड़ा, लेकिन मिशिका ने और जोर से उसे चूमा। उसकी साँसें तेज हो रही थीं, छाती राजवीर की छाती से सट गई थी।









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