मिशिका का समर्पण देख तीनों के चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और प्यार की चमक थी। कमरे की उस धीमी और रूमानी रोशनी में माहौल में एक अलग ही नशा घुल गया था। राजवीर, आर्यनवीर और जयवीर—तीनों राव ब्रदर्स—अब मिशिका के इर्द-गिर्द ऐसे घिरे हुए थे जैसे वह उनकी साँसों का हिस्सा बन गई हो। मिशिका पूरी तरह नंगी थी, उसका गोरा, मुलायम शरीर तीनों की गरम हथेलियों के नीचे काँप रहा था। उसके बड़े-बड़े, गोल-मटोल स्तन भारी साँसों से ऊपर-नीचे हो रहे थे, निप्पल्स पहले से ही कड़े और गुलाबी हो चुके थे। जाँघों के बीच उसकी चूत पहले से गीली थी, उसके होठों से हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं।









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