
काली रात के सन्नाटे को चीरती हुई चारों भाइयों की बुलेटप्रूफ एसयूवी गाड़ियाँ गायत्री राठौर के सुनसान फार्महाउस के सामने आकर रुकीं। फार्महाउस के भीतर गायत्री अपनी कामयाबी का जश्न मनाते हुए शैंपेन का ग्लास हाथ में लिए बैठी थी, लेकिन उसे अंदाजा भी नहीं था कि मौत उसके दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।
धड़ाम...!









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