
नयनतारा की साँसें धीमी पड़ने लगीं। शरीर थकान से ढल गया। तीनों उसके आसपास लेटे रहे। हाथ उसके शरीर पर ही थे—स्तन पर, जाँघ पर, पेट पर। नयनतारा ना चाहते हुए भी उनकी गरमाहट में सो गई। योनि अभी भी हल्की-हल्की सिकुड़ रही थी, अंदर भरा वीर्य धीरे-धीरे बाहर आ रहा था।
रात अभी बाकी थी। और राठौर भाई… अभी रुके नहीं थे।









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