
नयनतारा ने सिर्फ हाँ में कराह दी। वैराग्य ने लिंग निकाला। गांड के छेद पर रखा। धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाव दिया।
नयनतारा की गांड सिकुड़ी। फिर खुली। वैराग्य का मोटा लिंग धीरे-धीरे अंदर जाता गया। पूरा अंदर होने पर दोनों थोड़ी देर रुक गए। फिर वैराग्य ठोकने लगा। गांड की पोजीशन में धक्के गहरे और तेज़ थे। नयनतारा की चीखें सोफे में दब रही थीं। वैराग्य के हाथ उसके कूल्हों पर गहरे निशान छोड़ रहे थे।









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