
सुबह का समय बीत चुका था। हॉस्पिटल से निकलते समय आदित्य व्हीलचेयर पर बैठा था, अंजलि उसके बगल में चल रही थी और अभय गाड़ी चला रहा था। घर पहुँचते ही कयामत ने दरवाज़ा खोला। उसके चेहरे पर थकान तो थी, लेकिन जैसे ही उसने आदित्य और अंजलि को देखा, आँखें चमक उठीं।
“आदित्य… अंजलि…” कयामत की आवाज़ में खुशी साफ झलक रही थी। वह जल्दी से आगे बढ़ी और अंजलि को गले लगा लिया। “तुम दोनों आ गए… सच में बहुत अच्छा लगा।”









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