
सुबह के पास जब आखिरी बार वैराग्य ने उसे लिया, तब नयनतारा की आँखों में अब डर नहीं था। सिर्फ तृप्ति थी। वह वैराग्य के सीने से चिपककर लेटी थी। बाकी भाई उसके चारों तरफ बिखरे पड़े थे। शोभित व्हीलचेयर में झपकी ले रहा था।
नयनतारा ने धीरे से आँखें बंद कीं। उसके शरीर में अभी भी भाइयों का वीर्य भरा हुआ था। उसकी योनि हल्की-हल्की सिकुड़ रही थी। वह अब उनकी थी… पूरी तरह।









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