
अभय कार से निकला। दरवाज़ा जोर से खोला। उसकी साँसें तेज़ थीं, आँखों में वह पागलपन जो अभी-अभी उसने किसी को “भगवान के पास” भेजते समय महसूस किया था। विला के अंदर कयामत गुस्से में टहल रही थी। उसने अभय को देखा और तुरंत चिल्लाई—
“आप मुझे छोड़कर कहाँ चले गए थे? आप सच में बदल गए हो AR… मैंने आपको अपने करीब आने दिया और आप… आप सीधे बदल गए!”









Write a comment ...