गायत्री के मेंशन से बेआबरू होकर निकलते ही घर का भारी और हिंसक तनाव एक झटके में पिघल गया। लेकिन उस गुस्से के पीछे जो आग दबी हुई थी, वह अब इस बंद कमरे के भीतर एक बेहद उग्र और बेकाबू पैशन का रूप ले चुकी थी। कमरे का दरवाजा टूट चुका था, इसलिए रनविजय ने बिना एक पल गंवाए जानवी को अपनी मजबूत बाहों में उठाया और सीधे अपने खुद के साउंडप्रूफ और अभेद्य मास्टर बेडरूम में ले आया।
बाकी तीनों भाई—कर्ण, रौनक और आयुष भी उनके ठीक पीछे अंदर दाखिल हुए और भारी महोगनी का मुख्य द्वार अंदर से लॉक कर दिया गया।









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