
बाथरूम के अंदर शावर का गुनगुना पानी अब भी उन दोनों के भीगे बदन पर बरस रहा था। रौनक का जुनून इस कदर हावी था कि उसे वक्त और जगह का कोई होश नहीं था। जानवी उसके मजबूत गले में अपनी बाहें डाले, उसकी छाती से पूरी तरह सटी हुई हांफ रही थी। रौनक के होठों की गर्मी ने जानवी के अंदर की बची-कुची प्रतिरोधक क्षमता को भी पिघला दिया था। उसकी वाइन-रेड साड़ी का पल्लू पानी के वजन से नीचे फर्श पर सरक चुका था।
रौनक ने जानवी के चेहरे को दोनों हथेलियों में भरा और उसके गीले गालों को चूमते हुए फुसफुसाया, "तुम मेरी हो जानवी... सिर्फ मेरी।"









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