
राठौर कॉर्पोरेट ऑफिस का 50वां फ्लोर किसी शीशे के महल जैसा था। रनविजय के आलीशान केबिन के ठीक पीछे एक प्राइवेट रेस्ट-रूम बना हुआ था, जिसमें एक बेहद भव्य और आधुनिक बाथरूम था। इसकी एक पूरी दीवार कांच की थी, जहाँ से पूरी मुंबई शहर और दूर फैला समंदर साफ दिखाई देता था।
ऑफिस पहुँचते ही रनविजय किसी अर्जेंट बोर्ड मीटिंग के लिए चला गया था, और उसने जानवी को अपने केबिन के इसी प्राइवेट रेस्ट-रूम में आराम करने के लिए कहा था।












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