
मुंबई की बारिश हमेशा से खूबसूरत मानी जाती थी, लेकिन आज जानवी मेहरा के लिए इस बारिश की हर एक बूंद किसी भारी पत्थर की तरह उसके दिल पर गिर रही थी। 'राठौर मेंशन' के आलीशान और विशाल कांच के विंग से बाहर देखते हुए उसने अपनी हथेलियों को आपस में भींचा। उसकी उंगलियां ठंडी पड़ चुकी थीं।
"सिग्नेचर करो, जानवी। हमारे पास वक्त बहुत कम है," एक ठंडी, रोबदार और भारी आवाज बड़े से लिविंग रूम में गूंजी।












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